राजघाट पर अन्ना का सत्याग्रह आंदोलन

राजघाट पर अन्ना का सत्याग्रह आंदोलन
Updated 08:53 03 Tue Oct 2017
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नई दिल्ली। गांधी जयंती के मौके पर पूरा देश महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दे रहा था, तो वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे दिल्ली के राजघाट पर सत्याग्रह आंदोलन करने के लिए बैठे थे। राजघाट पर अन्ना हजारे एक दिन के लिए सत्याग्रह आंदोलन किया। आंदोलन पर बैठने से पहले मीडिया से मुखातिब होते हुए अन्ना ने कहा, मैं राजघाट पर बापू को नमन करने आया हूं, आज व्यथित होने का ये एक कारण है। देश के हालातों के बारे में बोलते हुए अन्ना ने कहा है कि वो दुखी नहीं है,क्योंकि दुखी वो लोग होते हैं जिनमें स्वार्थ की भावना हो।

पीएम मोदी को लिखा था खत

आंदोलन पर बैठने से पहले अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को खत लिखकर भ्रष्टाचार और किसानों की समस्याओं के निदान में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की थी। खत में अन्ना ने लिखा था कि दिल्ली में उनके आंदोलन के 6 वर्ष बाद भी भ्रष्टाचार को रोकने वाले कानून पर जमीनी स्तर पर अमल नहीं हो पाया है। खत के जरिए अन्ना ने साफ किया था कि अगर सरकार इन पहलूओं पर जल्द ही विचार नहीं करेगी तो उन्हें दोबारा से आंदोलन करना पड़ेगा। यही कारण है कि गांधी जयंती के मौके पर वो बापू की समाधि पर ही सत्याग्रह आंदोलन कर रहे हैं।

अन्ना आंदोलन के 6 वर्ष

अन्ना हजारे ने भारत को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में दिल्ली के रामलीला मैदान में एक आंदोलन किया था, इस आंदोलन में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लिया था। अन्ना के आंदोलन और लोगों की मांग को देखते हुए 27 अगस्त 2011 को भारतीय संसद में रिज्युलेशन पास किया था। इस रिज्युलेशन के तहत तमाम राज्यों में लोकायुक्त और सिटिजन चार्टर जैसे कई अहम मुद्दों पर जल्द से जल्द कानून बनाने की बात कही गई थी। इस रिज्युलेशन के पास होने के बाद अन्ना ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया था।

 

 

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