बापू के सपने को साकार करने की दिशा में बढ़ते कदम

बापू के सपने को साकार करने की दिशा में बढ़ते कदम
Updated 21:47 02 Mon Oct 2017
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आंखों पर चश्मा, हाथों में लाठी, खादी को देश की पहचान बताना और मन में सिर्फ एक बात, कोई भी काम हो साथ सबका हो। उक्त लिखी गई पंक्तियां सिर्फ एक शख्स की पहचान करा रही हैं, वो शख्स है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। एकला चलो की तर्ज पर चलने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत को आजाद कराने में एक अलग भूमिका निभाई थी। वो युद्ध किए बिना देश को अंग्रेजों से मुक्त कराना चाहते थे। भारत को आजाद कराने के बाद देश के विकास में महात्मा गांधी ने जो योजनाएं बनाई थी वर्तमान में भी वो लागू हैं। विकसित भारत के अलावा बापू का सपना था देश को स्वच्छ रखने का।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साल 2014 में उनकी जयंती पर शुरू किए स्वच्छ भारत अभियान की जिस लौ को जलाया गया था वो आज भी जल रही है। भारत को स्वच्छ करने के सपने में पीएम मोदी ने इस बात को स्पष्ट किया गया था कि देश का प्रत्येक नागरिक अगर इस अभियान में प्रतिवर्ष 100 घंटे देता है तो इस लक्ष्य को हासिल करने में आसानी होगी। पूरे भारत को स्वच्छ करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2 अक्टूबर 2019 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अभियान की शुरुआत करते समय पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि 2019 में जब बापू को श्रद्धाजंलि अर्पित की जाएगी तो वो सिर्फ श्रद्धा से नहीं बल्कि स्वच्छता भरी श्रद्धा से अर्पित की जाएगी, क्योंकि उस वक्त उनका सपना पूरा हो चुका होगा।

कई उद्देश्यों का लक्ष्य है ये योजना

मन में किसी काम के प्रति लगन और प्रेम हो तो वो पूरा होकर ही रहता है। इस कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा सिर्फ इसी पहलू को देखकर लगाया जा सकता है कि देश के बॉलीवुड जगत की हस्तियों से लेकर राजनेताओं के हाथों में झाडू आ गई। सभी ने बापू के सपने को पूरा करने के लिए एक स्वर में संदेश दिया। इस कार्यक्रम को पूर्ण करने के लिए ना तो किसी से वक्त मांगा गया और ना ही कोई पैसा। कही गई तो सिर्फ एक ही बात आप अपने पूरे दिन में अगर 15 मिनट भी देश की सड़कों, नदियों को साफ करने हेतु देते हैं तो ये पर्याप्त है। इस योजना को चलाने का मकसद केवल सफाईगीरी तक सीमित नहीं है बल्कि देश के हर नागरिक की सहभागिता से अधिक से अधिक पेड़ को लगाना, वातावरण को स्वच्छ बनाना, लोगों को खुले में शौच करने से रोकना, ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय का निर्माण, शौचालय के महत्व से लोगों को अवगत कराना है ताकि भारत को स्वच्छ के साथ स्वस्थ भी बनाया जा सके।


स्वच्छ होगा भारत तभी तो बढ़ेगा भारत

मोदी के सत्तासीन होते ही एक बात तो तय हो गई थी कि वो पारखी नजर रखते हैं और उन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लाना चाहते हैं जो भारत को विश्वस्तर पर पहचान दिला सके। स्वच्छ भारत अभियान में कई सारे मकसद समाहित हैं ,अमूनन ऐसा माना जाता है कि भारत को अपनी गंदगी के कारण विदेशो में शर्मिंदा होना पड़ता है। स्वच्छ भारत अभियान के निर्माण और छवि को सुधारने का ये सही अवसर प्रदान कर रहा है। जाहिर सी बात है जब भारत की छवि विदेशों में सुधरेगी तो विदेशी सैलानियों का आकर्षण बढ़ेगा जो आंकड़ा वर्तमान समय में 40 सैलानियों का है वो भविष्य में 100 और उससे अधिक सैलानियों का होगा। सैलानियों की संख्या बढ़ने से देश में रोजगार के अवसर के द्वार खुलेंगे ,अगर ऐसा कहा जाए तो ये गलत नहीं होगा।


योजना के बजट में सबका सहयोग
बता दें कि सरकार द्वारा इस योजना हेतु 62,009 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस बजट में केंद्र सरकार द्वारा महज 14,623 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएगा। जबकि 5,000 करोड़ रुपये का योगदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा। सवाल है कि बाकी शेष राशि का इंतजाम कैसे किया जाएगा। शेष राशि की पूर्ति पीपीपी और स्वच्छ भारत कोष में जमा पैसों से की जाएगी। 21वीं सदी के भारत में ग्रामीण आबादी का हिस्सा 75 करोड़ का है, लेकिन भारत के दुर्भाग्य की बात ये है कि आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी 50 करोड़ जनता के पास निजी शौचालय नहीं है। शौचालय के निर्माण के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को भी केंद्र सरकार द्वारा इस मिशन को हासिल करने के लिए बढ़ा दिया गया है। ताकि ग्रामीण जनता पर शौचालय बनाने के लिए जो आर्थिक बोझ आता है उससे निजात दिलाई जा सके।

जानिए क्या है राशि के वितरण का आंकड़ा

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अब तक आवंटित की गई राशि

2014-15: 2,850 करोड़ रुपये
2015-16: 6,525 करोड़ रुपये
2016-17: 9000 करोड़ रुपये
शहरी विकास मंत्रालय द्वारा दी गई राशि

2014-15: 860 करोड़ रुपये
2015-16: 1,079 करोड़ रुपये
2016-17: 2,817 करोड़ रुपये
 

आशु दास 

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