कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बारे में दिया बड़ा बयान

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बारे में दिया बड़ा बयान
Updated 21:21 19 Wed Jul 2017
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बांसवाडा। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने के वायदे से मुकरने का अरोप लगाते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के पास लोकसभा में किसानों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए समय नहीं है, लेकिन अमेरिका को जीएसटी कानून दिखाने के लिए रात्रि बारह बजे संसद को खोल दिया।

गांधी राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाडा शहर में प्रदेश कांगेस कमेटी द्वारा आयोजित किसान आक्रोश रैली को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बुधवार की सुबह वह लोकसभा गये थे और देश में किसानों की दुदर्शा के लिये केवल दस से पन्द्रह मिनट चर्चा करने का समय मांगा लेकिन उन्हें यह समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास गरीब, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारियों के दुख दर्द सुनने का समय नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने से पहले देश की जनता और नौजवानों से दो प्रमुख वायदे किये थे। इसमें एक प्रति साल दो करोड़ युवाओं को नौकरियां दी जायेगी और दूसरा प्रत्येक व्यक्ति के खाते में पन्द्रह पन्द्रह लाख रुपये जमा कराया जायेगा। उन्होंने कहा कि जब मैंने संसद में सवाल उठाया कि कितने लोगों को रोजगार दिया गया तब जबाव मिला कि यह संख्या एक लाख से भी कम हैं।

गांधी ने कहा कि यूपी में चुनावों से पूर्व उन्होंने 60 दिन तक राज्य में घूम घूम कर किसानों की समस्याएं सुनी और केवल उत्तर प्रदेश में दो करोड़ फार्म भरवाये गये। इसमें सभी किसानों ने अपनी पहली प्राथमिकता कर्जा माफी, दूसरी उपज का उचित दाम और तीसरी बिजली के बिल को आधा करने का आग्रह शामिल था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में किसानों की मांगों से संबंधित सभी फार्म पीएम नरेन्द्र मोदी को सौंपते हुये दबाव बनाया तो सरकार को कर्जा माफी की घोषणा करनी पड़ी।

उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस शासित प्रदेश पंजाब और कर्नाटक की सरकारें कर्जा माफ कर सकती हैं तो राजस्थान की सरकार कर्जा क्यों नहीं माफ कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में किसान को उपज की सही लागत नहीं मिलती है। जिससे किसानों के ऊपर कर्ज हो गया हैं।

राहुल गांधी ने कहा कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के युवा अध्यक्ष सचिन पायलट राज्य सरकार पर ऐसा दबाव बनाये की राज्य सरकार किसानों के कर्जा माफ करने के लिए मजबूर हो जाए। उन्होंने इस अवसर पर मंच पर मौजूद पूर्व सीएम अशोक गहलोत और राष्ट्रीय महासचिव डा.सी.पी.जोशी से भी कहा कि वे इसमें कांग्रेस अध्यक्ष की मदद करें। इस अवसर पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी द्वारा थोथे वायदे कर सत्ता हथियाने की पोल खुल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने मन बना लिया हैं कि अगली सरकार यहां कांग्रेस की बनेगी।

आलोक ने कहा, ''इन दोनों बातों का कोई संबंध नहीं है। राजनीतिक और आधिकारिक। मुख्यमंत्री से वह अधिकारिक तौर पर मिल रहे हैं। हम यहां बात कर रहे हैं अपनी पार्टी की ओर से जो कि राजनीतिक बातें हैं। हमारी पार्टी का जो रुख है उस पर राजद और उसके नेता तेजस्वी यादव को जवाब देना है। हम आज भी इंतजार कर रहे हैं।''

उन्होंने यह जरुर दावा किया कि महागठबंधन बहुत मजबूत है। उसमें कोई दिक्कत नहीं। जदयू के दूसरे प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मुलाकात को सरकारी कार्यों को लेकर 'सामान्य' बैठक बताया।

होटल के बदले भूखंड मामले को लेकर जदयू और राजद के बीच बढ़ी कटुता के बीच गत 15 जुलाई को पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए थे, लेकिन उसमें उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव नदारद थे। जिससे इस कटुता के चरम सीमा पर पहुंच जाने की अटकलें लगायी जाने लगी थी। इस बीच तेजस्वी ने कल शाम में नीतीश की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रिपरिषद में भाग लिया था।

पटना स्थित पुराने सचिवालय में मंगलवार की शाम करीब एक घंटे तक चली राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद तेजस्वी मुख्यमंत्री के कक्ष में गए थे और उनसे उनकी यह मुलाकात करीब 45 मिनट चली थी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और तेजस्वी के भाई तेजप्रताप यादव और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी भी मुख्यमंत्री के कमरे में मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि लालू प्रसाद के रेल मंत्रित्वकाल के दौरान 2004 में रांची और पुरी स्थित आईआरसीटीसी के दो होटलों के लाइसेंस निर्गत किए जाने के बदले लालू के परिवार को तीन एकड़ भूखंड दिए जाने के आरोप के मामले में तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और पांच अन्य का नाम आया था।

इसके मददेनजर सीबीआई द्वारा लालू के आवास सहित 12 ठिकानों पर छापे के बाद करीब पांच दिनों तक चुप रही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने तेजस्वी से उनपर लगे आरोप के बारे में पूर्ण तथ्यों के साथ जनता के सामने जाने के लिए कहा था, लेकिन राजद प्रमुख ने अपनी ओर से महागठबंधन तोड़ने से इंकार किया करते हुए अपने विधायक दल के उस निर्णय का उल्लेख किया कि तेजस्वी के इस्तीफा का कहीं कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

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