संजय दत्त ने दी रणवीर कपूर को हिम्मत

संजय दत्त ने दी रणवीर कपूर को हिम्मत
Updated 21:24 19 Wed Jul 2017
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फिल्मी बीट। अभिनेता रणबीर कपूर अपनी फिल्म 'जग्गा जासूस' की रिलीज के लिए तैयार हैं और इस फिल्म की रिलीज के बाद उनका पूरा ध्यान संजय दत्त की जिंदगी पर बन रही फिल्म पर होगा, जिसमें वह संजय दत्त का किरदार निभा रहे हैं लेकिन वह खुद नहीं चाहते कि कभी उनकी जिंदगी पर कोई फिल्म बने क्योंकि अपनी जिंदगी की हकीकत को पर्दे पर पेश करने की हिम्मत उनमें नहीं है।

रणबीर कपूर की 'जग्गा जासूस' कई वर्षो के इंतजार के बाद आखिरकार रिलीज के मुहाने पर खड़ी है। यह 18 साल का 'जग्गा' जासूस जेम्स बांड की तरह हीरो टाइप जासूस नहीं है लेकिन उनके किरदार को कई जासूसों का मिश्रण कह सकते हैं।

रणबीर ने कहा कि, "जग्गा का किरदार हीरो टाइप किरदार नहीं है क्योंकि जासूस बनने के लिए आपको हीरो की तरह दिखने की जरूरत नहीं है। हम इस किरदार को थोड़ा हटके बनाना चाहते थे और इसलिए हमने जग्गा के हेयरस्टाइल और अन्य तमाम चीजों पर एक्सपेरिमेंट किया। अनुराग दादा जग्गा का अतरंगी टाइप हेयरस्टाइल चाहते थे, जो उसकी पहचान बन सके।"

'जग्गा जासूस' के प्रचार के लिए नई दिल्ली पहुंचे रणबीर कहते हैं, "मेरा हेयरस्टाइल टिनटिन से प्रेरित है लेकिन हमारी कहानी टिनटिन से बिल्कुल मेल नहीं खाती। जग्गा जासूस को टिनटिन, शरलॉक होम्स, ब्योमकेश बख्शी और हार्डी ब्यॉज जैसे जासूसों से प्रेरणा मिली है।"

हालांकि, 'जग्गा जासूस' को बच्चों की फिल्म बताकर प्रचारित किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद सेंसर बोर्ड ने फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट दिया है। इसके बारे में पूछने पर रणबीर कहते हैं, "सेंसर बोर्ड ने अपना काम बखूबी किया है। हमें इससे कोई परेशानी नहीं है। जंगल बुक को भी यू/ए सर्टिफिकेट दिया गया था, जबकि वह बच्चों की फिल्म थी। दरअसल, जग्गा जासूस में एक्शन बहुत है और शायद इस फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट मिलने की यह एक वजह हो सकती है लेकिन हमें बोर्ड के इस फैसले से कोई शिकायत नहीं है।"

फिल्म की कहानी के बारे में पूछने पर रणबीर कहते हैं, "फिल्म में एक बेटा अपने बाप को ढूंढ रहा है। उसे अंदाजा भी नहीं है कि उसका पिता कहां है। वह श्रुति (कैटरीना कैफ) के साथ मिलकर उसे ढूंढने निकल जाता है। श्रुति एक खोजी पत्रकार है। इस फिल्म की खास बात इसकी लोकेशन भी है। अनुराग दादा अपनी फिल्मों में लोकेशन को लोकप्रिय बना देने का माद्दा रखते हैं और उन्होंने यह कमाल इस फिल्म में भी किया है। हमने इस फिल्म की शूटिग दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड के शहर पाई, दार्जिलिंग, कोलकाता और मोरक्को में की है। फिल्म में दो काल्पनिक जगह भी है, एक पूर्वोत्तर भारत का उखरुल और अफ्रीका का एक शहर मुमबाका। फिल्म की कहानी इन दोनों शहरों के इर्द-गिर्द घूमती है।"

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