बापू की ये धरोहर आज सैलानियों का मोह रही है मन

बापू की ये धरोहर आज सैलानियों का मोह रही है मन
Updated 21:31 02 Mon Oct 2017
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नई दिल्ली। 2 अक्टूबर को देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म दिन मना रहा है। महात्मा गांधी ने देश की हर विधा के साथ समाज को स्वास्थ्य से लेकर पर्यटन के कई आयाम दिए हैं। आज राष्ट्रपिता को जानने के लिए कई स्थल बड़े पर्यटन के केन्द्र बन गए हैं। जहां आजादी की लड़ाई के दौरान का वक्त महात्मा गांधी ने बिताया था। आज ये स्थल महात्मा गांधी की याद को ताजा किए हुए हैं। यहां पर अतीत और गांधी जी की याद से जुड़ी कई बातें और सामान लोगों को अपनी तरफ खींचे हुए हैं।

पोरबंदर

यह वह स्थान है जहां पर 2 अक्टूबर 1969 में महात्मा गांधी ने जन्म लिया था। यह स्थान गुजरात के प्रांत में स्थित है, पोरबंदर में महात्मा गाधी के बचपन से जुड़ी कई यादें हैं। इसके साथ ही यहां पर उनका वो पैतृक घर भी मौजूद है जहां पर उन्होने जन्म लिया था। इसके अलावा वह मंदिर है जहां पर अपनी माता के साथ वो जाया करते थे। इसके साथ ही यहां पर उनके बाल्य जीवन से युवावस्था तक की कई यादें हैं। यहां पर आकर लोग गांधी जी को करीब पाते हैं। उनके जीवन और आदर्शों के बारे में बहुत कुछ जान पाते हैं।

अहमदाबाद

गांधी जी से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों में अहमदाबाद का नाम आता है। यह स्थल भी गुजरात प्रांत के अन्तगर्त आता है। इस स्थल पर गांधी जी और उनकी जीवन यात्रा से जुड़े कई तथ्य आज भी जीवंत हैं। अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट के किनारे गांधी जी का विश्व प्रसिद्ध आश्रम भी मौजूद है। इस आश्रम के दर्शन और यहां पर गांधी जी से जुड़े प्रवासों की बड़ी श्रृंखला का अध्ययन करने विदेशों से भी लोग आते हैं। इस आश्रम में गांधी जी ने अपनी पत्नी कस्तूरबा के साथ 12 साल बिताए थे। इस आश्रम में आज भी गांधी जी के सामानों का अपना स्थान वैसे ही सुरक्षित है जैसा उन्होने छोड़ा था।

दांडी

गुजरात से गांधी जी का बड़ा ही लगाव था। चूंकि यह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जन्म स्थली भी थी। इसी प्रांत से उन्होने अंग्रेजों के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा था। महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थलों में से ये एक बड़ा ही ऐतिहासिक स्थान हैं। यहां से बापू ने अंग्रेजी सरकार के खिलाफ नमक तोड़ों आंदोलन की शुरूआत की थी। बापू ने ये आंदोलन 12 मार्च 1930 को नमक सत्याग्रह के तौर पर चलाया था। गांधी ने इस आंदोलन के लिए साबरमती से दांडी तक की यात्रा की थी। गांधी जी ने यह यात्रा साबरमती से दांडी तक 268 किलोमीटर पैदल चल कर 24 दिनों ने पूरी की थी। आज इस स्थान को देखने के लिए लोग बड़ी संख्या में आते हैं।

वाराणसी

बाबा भोलेनाथ की नगरी वारणसी से भी गांधी जी का बड़ा ही गहरा संबंध रहा है। यहां पर गांधी जी ने अपने असहयोग आंदोलन के दौरान काशी विद्यापीठ की आधारशिला 1921 में रखी थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य छात्रों को शिक्षित करने के साथ उनमें राष्ट्रीय भावना का संचार करते हुए देश की आजादी के लिए प्रेरित करना था। देश की आजादी के बाद इस विद्यालय का नाम बदल कर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ कर दिया। इसको साल 1995 में नए नाम से गांधी जी को समर्पित कर दिया है।

दिल्ली

1957 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने कलकत्ता के बजाय दिल्ली को अपना केन्द्र बनाया। इसलिए देश में होने वाली सभी राजनीतिक गतिविधियों का भी केन्द्र बिन्दु दिल्ली ही था। यहां पर कई स्थान महात्मा गांधी से जुड़े हैं। इसके साथ ही उनकी अन्तिम यात्रा और समाधि स्थल भी दिल्ली में ही है। यहां पर मौजूद बिरला हाऊस में महात्मा गांधी से जुड़ी बातों और चीजों का एक विशाल संग्रहालय है। अन्तिम दिनों में महात्मा गांधी ने अपने जीवन के 144 दिन यहीं बिताए थे।

 

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